प्राकृतिक खेती को अपनाकर जिले के युवा कृषक न केवल खेती की लागत कम कर रहे हैं, बल्कि फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन में वृद्धि के साथ अपनी आय भी बढ़ा रहे हैं। सोण्डवा विकासखंड के ग्राम लोढणी के युवा कृषक श्री बलराम डावर ऐसे ही कृषकों में शामिल हैं, जिन्होंने विगत दो वर्षों से प्राकृतिक खेती को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया है।
श्री डावर ने बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के अंतर्गत प्राप्त अनुग्रह राशि एवं मार्गदर्शन से उन्होंने प्राकृतिक खेती के विभिन्न तरीकों को अपनाया। उन्होंने अपने खेत पर जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र एवं ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार कर फसलों में उनका उपयोग एवं छिड़काव किया। इससे फसलों के उपचार के लिए बाजार से महंगे रासायनिक आदान खरीदने की आवश्यकता काफी कम हुई और खेती की लागत में कमी आई।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से अब कम लागत में फसलों का उपचार करना आसान एवं किफायती हो गया है। रासायनिक कृषि आदानों के उपयोग में कमी आने से उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है तथा फसलों के उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। इससे उनकी कृषि आय में सकारात्मक बढ़ोतरी हुई है।
श्री डावर ने प्राकृतिक खेती को अपने अनुभव का लाभ बताते हुए कहा कि कम लागत, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और बेहतर उत्पादन प्राकृतिक खेती की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं। उन्होंने जिले के अन्य कृषकों से भी प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ने और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर इसे अपनाने का आह्वान किया।
युवा कृषक श्री बलराम डावर ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए संचालित योजना के प्रति प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं एवं मार्गदर्शन से किसानों को खेती के नए और टिकाऊ तरीकों को अपनाने में प्रोत्साहन मिल रहा है।


