मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम (सीएमसीएलडीपी) के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय तामिया में बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं के लिए आज संपर्क कक्षा का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री अखिलेश जैन के निर्देशन तथा विकासखंड समन्वयक श्रीमती ललिता कुशरे के मार्गदर्शन में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के उपलक्ष्य में विशेष व्याख्यान माला आयोजित की गई।

व्याख्यान माला में परामर्शदाता श्री पंकज राय, श्रीमती स्वाति सूर्यवंशी, श्री सुभाष मिनोटे, श्री संदीप राज एवं श्री महेंद्र यादव ने छात्र-छात्राओं को विषयवार अध्यापन कार्य करवाया तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन, व्यक्तित्व, विचारों एवं सामाजिक योगदान पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। परामर्शदाताओं ने एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के सिद्धांतों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए बताया कि अंत्योदय का मूल उद्देश्य समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना तथा उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी क्रमवार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन, विचारों एवं उनके द्वारा किए गए विशिष्ट कार्यों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। लगभग दो घंटे तक चले इस संवादात्मक कार्यक्रम में उनके जन्म, सामाजिक एवं राष्ट्रहित में किए गए कार्यों तथा समाज को दिए गए प्रेरणादायी योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।

विकासखंड समन्वयक श्रीमती ललिता कुशरे ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के व्यक्तित्व एवं अंत्योदय की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन द्वारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सीएमसीएलडीपी के छात्र-छात्राओं को इस प्रक्रिया से जोड़ते हुए समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं की जानकारी एवं लाभ पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

परामर्शदाता श्रीमती स्वाति सूर्यवंशी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विशिष्ट कार्यों एवं उनके सामाजिक चिंतन पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्र-छात्राओं को उनके विचारों को अपने सामाजिक कार्य एवं क्षेत्रीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

संपर्क कक्षा के दौरान सीएमसीएलडीपी से संबंधित शैक्षणिक एवं व्यावहारिक कार्यों की भी जानकारी दी गई। इसमें मुख्य रूप से एलिजिबिलिटी अप्रूवल, प्रयोगशाला ग्राम का चयन, प्रोफाइल अपडेटेशन, पाठ्य पुस्तक वितरण, फील्ड वर्क एवं असाइनमेंट आदि कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा सभी छात्र-छात्राओं को इन कार्यों को गंभीरता एवं समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया गया।

संपर्क कक्षा में विषयवार निर्धारित पाठ्य सामग्री के आधार पर अलग-अलग सत्रों का संचालन किया गया। विभिन्न परामर्शदाताओं द्वारा छात्र-छात्राओं को विषयानुसार मार्गदर्शन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराते हुए पाठ्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को समझाया गया।