भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में उसकी सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रीय पहचान झलकती है। इसने देश में डिजिटलीकरण , पर्यटन अवसंरचना और सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से विरासत संरक्षण को मजबूती प्रदान की है।

सरकार ने भारत की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरोद्धार के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। इन प्रयासों से पर्यटन, संपर्क सुविधा, पर्यटकों के लिए सुविधाओं और स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है तथा देश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में मदद मिली है।

तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक , विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद)

स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत सर्किट-आधारित विकास से आगे बढ़ते हुए गंतव्य-केन्‍द्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है।

सरकार ने औपनिवेशिक शोषण , विदेशी कब्जों और अवैध तस्करी के माध्यम से विदेश ले जाई गई पवित्र धरोहरों और पुरावशेषों को भारत वापस लाने के प्रयास तेज किए हैं।

स्वदेश वापसी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं :

भारत ने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का विस्तार किया।

नई दिल्ली और लद्दाख में भी 2026 में घरेलू प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया, जिनमें भारत वापस लाए गए पिपरहवा अवशेषों को प्रदर्शित किया गया।

प्रत्‍यक्ष अनुभव देने वाला भारत का पहला पुरातात्विक संग्रहालय – वडनगर , गुजरात

विरासत के दस्तावेजीकरण और संरक्षण को मजबूत करने के लिए एलआईडीएआर (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) स्कैनिंग, जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली)-आधारित मैपिंग और ड्रोन सर्वेक्षण जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है। सरकार सांस्कृतिक परिसंपत्तियों और विरासत संबंधी आंकड़ों के डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और उनकी सुलभता में सहायता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का भी उपयोग कर रही है।

संस्कृति और ज्ञान के संरक्षण के लिए एआई का उपयोग

भारत भाषाओं, पांडुलिपियों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग कर रहा है।

भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय (एनएमआईसी )

भारत की सांस्कृतिक विरासत उसके अतीत , वर्तमान और भविष्य के बीच एक जीवंत कड़ी है। निरंतर संरक्षण , डिजिटलीकरण, पुनरुद्धार और संवर्धन के माध्यम से सरकार ने इस विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आम जनता की पहुंच को व्यापक बनाने के प्रयासों को मजबूत किया है। ये प्रयास ऐसा भविष्य निर्मित करने में सहायक होंगे, जहां विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान , पहचान और प्रेरणा के एक गतिशील स्रोत के रूप में बनी रहेगी।

साइट को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) द्वारा होस्ट किया जाता है । इस पर सूचनाएं पत्र सूचना कार्यालय, "ए" विंग, शास्त्री भवन, डॉ राजेंद्र प्रसाद रोड़, शास्त्री भवन, नई दिल्ली – 110001, फोन : 23389338 द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है और अद्यतित की जाती है ।

मुख्य बातें

  • भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में उसकी सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रीय पहचान झलकती है।
  • इसने देश में डिजिटलीकरण , पर्यटन अवसंरचना और सांस्कृतिक संरक्षण के माध्यम से विरासत संरक्षण को मजबूती प्रदान की है।
  • सरकार ने भारत की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरोद्धार के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं।

स्रोत और संदर्भ

  1. पत्र सूचना कार्यालय (PIB) · भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा ↗21 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें