65 डिसमिल जमीन... इतनी कम जमीन कि परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल। पति मजदूरी करते थे और घर की जरूरतें पूरी करने के लिए अभिलाषा रेकवार को भी संघर्ष करना पड़ता था। लेकिन वर्ष 2022 में आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने करवट ली। पाटन विकासखंड की सोनतलाई गांव की अभिलाषा ने सीआईएफ (सामुदायिक निवेश ऋण )से ऋण लेकर एक भैंस खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया।
आमदनी बढ़ी तो दूसरी भैंस खरीदी और धीरे-धीरे पशुपालन को अपनी आय का मजबूत जरिया बना लिया। आज उनके पास पांच भैंसें हैं और पशुपालन से सालाना करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक की आय हो रही है।
अभिलाषा बताती हैं कि जमीन नाममात्र की है और पति मजदूरी करते थे। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वर्ष 2022 में वे आजीविका मिशन से जुड़ीं। मिशन के माध्यम से उन्हें सीआईएफ (सामुदायिक निवेश निधि) से ऋण मिला। इससे उन्होंने पहली भैंस खरीदी और दूध बेचकर आमदनी शुरू की।
दूध की बिक्री से आय बढ़ने लगी तो उन्होंने आजीविका मिशन से दोबारा ऋण लेकर दूसरी भैंस खरीदी। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे पशुपालन का विस्तार किया। आज उनके पास पांच भैंसें हैं। दूध बिक्री और पशुपालन से होने वाली आय से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।
बैंक सखी बनकर महिलाओं को भी जोड़ रहीं
पशुपालन के साथ अभिलाषा आजीविका मिशन के कामों में भी सक्रिय हैं। वे बैंक सखी के रूप में काम कर रही हैं और ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में मदद करती हैं। उनका कहना है कि आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद न केवल आमदनी बढ़ी, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
अभिलाषा इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि आजीविका मिशन जैसी योजनाओं से गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है।


