डोंगला में दूरबीन लगाने के बाद शोधकर्ताओं ने वहाँ की रात को भी परखा। तारों की तस्वीर कितनी उपयोगी बनेगी, यह दर्पण के आकार के साथ स्थानीय आकाश पर निर्भर है। एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की 2023 बैठक में प्रस्तुत अध्ययन इसी सवाल पर था। MPCST, गौहाटी विश्वविद्यालय और भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने वराहमिहिर वेधशाला में आकाश की पृष्ठभूमि-चमक, वायुमंडल में प्रकाश के क्षय और तारों की छवि के फैलाव को मापा।

आधा मीटर दर्पण और डिजिटल कैमरा

वेधशाला में 0.5 मीटर, लगभग 20 इंच की PlaneWave दूरबीन है। उसके साथ बड़े प्रारूप का Apogee CCD कैमरा जुड़ा है। CCD पर आने वाला प्रकाश पिक्सेलों में दर्ज होता है और डिजिटल माप में बदला जाता है। इन मापों से तारों की चमक में छोटे अंतर और समय के साथ हुए बदलाव का अध्ययन किया जा सकता है।

UBVRI फिल्टर पराबैंगनी से निकट-अवरक्त तक चुने हुए प्रकाश-पट अलग करते हैं। इससे किसी स्रोत की चमक को अलग-अलग तरंगदैर्घ्य में मापा जा सकता है। इस तरह की चमक-माप को फोटोमेट्री कहते हैं। एक ही वस्तु की अलग फिल्टरों में ली गई तस्वीरें उसके प्रकाश का अधिक उपयोगी विवरण देती हैं।

तारों की छवि को हिलाता वातावरण

अध्ययन का स्थल उज्जैन से लगभग 40 किलोमीटर उत्तर, डोंगला के पास है। ASI का विवरण इसे कम ऊँचाई और गाँवों से घिरा स्थान बताता है। वहाँ ‘सीइंग’ मापी गई—वायुमंडलीय हलचल से तारों की छवि कितनी डगमगाती या फैलती है। आकाश की अपनी चमक और प्रकाश का क्षय भी जरूरी हैं: उनके कारण एक जैसे यंत्र को अलग स्थानों पर अलग गुणवत्ता का संकेत मिल सकता है।

अवलोकन से प्रशिक्षण तक

2026 के ASI दस्तावेज में इसी सुविधा पर M42, यानी ओरायन नीहारिका, की शुरुआती शोध-उन्मुख फोटोमेट्री और शिक्षण गतिविधियाँ दर्ज हैं। अगस्त 2024 के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सार ने गुंबद का स्वचालन और बाद में संस्थानों को दूरस्थ पहुँच देने का प्रस्ताव बताया था। सितंबर 2026 में जाँची गई IIT इंदौर की आधिकारिक परियोजना-सूची में डोंगला के दूरस्थ संचालन और स्वचालन का काम अब भी जारी दर्ज है। सार्वजनिक दर्शन या दूरस्थ अवलोकन की योजना बनाने से पहले संस्थान से उपलब्धता की पुष्टि जरूरी है।

मुख्य बातें

  • डोंगला की वराहमिहिर वेधशाला में 0.5 मीटर, लगभग 20 इंच की PlaneWave प्रकाशीय दूरबीन दस्तावेजों में दर्ज है।
  • CCD कैमरा और UBVRI फिल्टर दूरबीन से आए प्रकाश को डिजिटल माप तथा अलग-अलग प्रकाश-पटों की चमक-माप में बदलते हैं।
  • ASI 2023 के अध्ययन में इसी दूरबीन से sky brightness, atmospheric extinction और seeing मापकर स्थल की अवलोकन-क्षमता का परीक्षण किया गया।

स्रोत और संदर्भ

  1. Astronomical Society of India · Evaluation of night sky at Varahmihir Astronomical Observatory, Dongla, Ujjain ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. International Astronomical Union General Assembly 2024 · Automation of the Dongla Observatory and Proposal to include it as a part of Global Network ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  3. Astronomical Society of India · Ujjain planetarium and Dongla observatory educational initiatives — ASI2026_339 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  4. IIT Indore, Research & Development · Sponsored Research Projects — Remote Operation and Automation of Dongla Observatory ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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