नोट छत्ता रजिस्टर नहीं। 30 जनवरी 2025। रासायनिक उर्वरक न लगाने वाली जैविक-प्राकृतिक खेती। क्लस्टर से अग्रणी रहने का लक्ष्य।
रेशम उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन का भी कार्य किया जा रहा है। मधु “भी” को बक्से की गिनती नहीं बनाती। मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर प्रमुखता से। सहकारिता को कृषि-उद्यानिकी से सम्बद्ध करने का उल्लेख।
बोर्ड है, पाँच वर्ष योजना हैं
प्राकृतिक खेती बोर्ड गठित। आगे: पाँच वर्षों में कृषि निर्यात दोगुना, सोयाबीन MSP खरीद बढ़ाना, उज्जैन चना संस्थान, डिंडोरी श्रीअन्न संस्थान, ग्वालियर सरसों संस्थान, 10 सोयाबीन एफपीओ, मिशन दाल। चित्र दक्षिण पन्ना झिरिया फ्रेम का है, जैविक क्लस्टर का स्वतंत्र चित्र नहीं।
मुख्य बातें
- मधुमक्खी पालन एक “भी” पंक्ति है, बक्सा तालिका नहीं।
- सबसे अधिक जैविक क्षेत्रफल विभाग का दावा है।
- निर्यात दोगुना आगे की योजना है।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



