कभी गांव की सीमाओं तक सिमटा आरती तोमर का जीवन आज आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है। मुरैना जिले के ग्राम कौंथरखुर्द की आरती ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी आगे बढ़ने की राह तैयार की। 15 महिलाओं को साथ लेकर गठित किए गए स्व-सहायता समूह से जुड़कर आरती ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और आज वह स्वयं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

आरती बताती हैं कि स्व-सहायता समूह बनने के बाद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से उन्हें आरएफ, सीआईएफ और सीसीएल के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिला। सीसीएल की दूसरी किश्त प्राप्त होने के बाद उन्होंने विभिन्न आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। इन गतिविधियों से उन्हें अपनी आय का साधन मिला और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहयोग मिला। समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के चलते उन्होंने सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (सीआरपी) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही लखपति दीदी अभियान और ग्राम गरीबी उन्मूलन योजना से जुड़कर भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई।

आरती के लिए यह बदलाव केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं रहा। स्व-सहायता समूह ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया और उन्हें घर की चौखट से बाहर निकलकर अपनी प्रतिभा और क्षमता को पहचानने का अवसर दिया। वह बताती हैं कि पहले गांव से बाहर जाकर किसी कार्यक्रम में शामिल होने या अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर बहुत कम मिलते थे। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऐसे कई अवसर मिले, जहां उन्होंने न केवल अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, बल्कि अन्य महिलाओं के साथ आगे बढ़ने का अनुभव भी हासिल किया।

हाल ही में 17 सितम्बर को आयोजित कार्यक्रम में जिले में हुई खेल प्रतियोगिता में आरती ने अपनी साथी महिलाओं के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया और विजयी होकर लौटीं। इसी कार्यक्रम में उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ दीप प्रज्ज्वलन में भी सहभागिता की। आरती के लिए ये छोटे-छोटे अवसर उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान देने वाले साबित हुए।

आरती कहती हैं, “स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिला। आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं। अपने पति की आर्थिक मदद करने के साथ बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग कर पा रही हूं। समूह ने मुझे केवल आत्मनिर्भर नहीं बनाया, बल्कि अपने भीतर विश्वास पैदा करना भी सिखाया है।”

वह कहती हैं कि आजीविका गतिविधियों से जुड़ने के बाद उन्हें यह विश्वास मिला है कि ग्रामीण महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यही विश्वास अब वह गांव की अन्य महिलाओं तक पहुंचा रही हैं और उन्हें स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी क्षमता को पहचानने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

आरती तोमर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों ने उनके जैसी अनेक ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव का रास्ता खोला है। वह कहती हैं कि महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करने वाली पहल से उनके जीवन को नई दिशा मिली है। आज आरती की कहानी केवल उनके अपने जीवन में आए बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की कहानी है, जो एक महिला को आगे बढ़ने का अवसर मिलने पर पूरे समुदाय में बदलाव की नई शुरुआत कर सकता है।