*भोपाल में ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ 12 से 18 अक्टूबर तक, 10 से अधिक कला – साहित्य विधाओं में प्रदर्शित होंगे श्रीरामकथा के प्रसंग, 5 से अधिक देशों के विद्वान एवं कलाकार होंगे शामिल*
*ओरछा एवं चित्रकूट में भी आयोजित होगा ‘श्रीरामलीला उत्सव’, सुविख्यात लीला मंडलियां मंच पर जीवंत करेंगी श्रीराम के आदर्श*
*भोपाल में एक साथ जुड़ेंगे सुविख्यात विद्वान, विशेषज्ञ, शोधकर्ता, संग्रहकर्ता, नृत्य कलाकार, चित्रकार, स्टोरी टेलर, कठपुतली कलाकार एवं गायक*
*श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, संस्कृति विभाग का सुप्रतिष्ठित आयोजन, संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में श्रीराम जन्म से लेकर राज्याभिषेक के प्रसंग होंगे मंचित*
*भोपाल।* भारत की सांस्कृतिक परंपरा में भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने की सुदीर्घ एवं समृद्ध परंपरा रही है। श्रीराम के जीवन के विविध प्रसंगों यथा जन्म, बाल लीलाओं, वनगमन, सीता हरण, हनुमान भक्ति, लंका विजय और अयोध्या वापसी को अभिनय, संवाद, संगीत, गायन एवं आकर्षक वेशभूषा के माध्यम से मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। लोकजीवन में विकसित इस अनूठी नाट्य परंपरा को ‘श्रीरामलीला’ के नाम से जाना जाता है।
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला सुप्रतिष्ठित ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ इस वर्ष भी 12 से 18 अक्टूबर, 2026 तक रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित यह उत्सव श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों को बहु कलाओं के माध्यम से प्रदर्शित किए जाने का शाश्वत प्रयास है। साथ ही श्रीरामलीला उत्सव का आयोजन 11 से 13 अक्टूबर, 2026 तक श्रीराम राजा मंदिर परिसर, ओरछा (जिला – निवाड़ी) एवं 13 से 19 अक्टूबर, 2026 तक राघव प्रयाग घाट, चित्रकूट में भी किया जा रहा है।
माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बुधवार को रवींद्र भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव इस वर्ष न सिर्फ लीला प्रदर्शन तक सीमित रहेगा, बल्कि विविध कला विधाओं के माध्यम से श्रीरामकथा प्रसंगों को प्रदर्शित करेगा। इसमें लीला प्रदर्शन के साथ ही बौद्धिक सत्र, स्टोरी टेलिंग सेशन, प्रदर्शिनियां, कला शिविर, कला कार्यशाला, कठपुतली प्रदर्शन, भजन जैमिंग केन्द्रित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र - नई दिल्ली, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र – नागपुर एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्, नई दिल्ली का भी विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि भोपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का शुभारंभ 12 अक्टूबर, 2026 को सायं 7 बजे मुक्ताकाश मंच, रवीन्द्र भवन में होगा। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। साथ ही प्रबुद्ध विचारक डॉ. इंद्रेश कुमार, माननीय संस्कृति मंत्री श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी एवं संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी।
संचालक, संस्कृति एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार नवदुर्गा उत्सव के दौरान अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव के माध्यम से यह प्रयास है कि धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भारतीय परंपराओं, संस्कृति और जीवन-मूल्यों का लोकव्यापीकरण हो एवं इनकी समृद्ध विरासत को आमजन, विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक विविध सांस्कृतिक स्वरूपों में पहुंचाया जा सके। हमारे उत्सव केवल धार्मिक आस्था के अवसर न रहकर भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, कला-विधाओं और जीवन-दृष्टि के जीवंत संवाहक बनें, यही इस आयोजन का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ते हुए उनमें निहित मूल्यों का आत्मसात कराया जा सकता है। यह लोकव्यापीकरण हमारी सांस्कृतिक विरासत को केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित रखने के बजाय उसे भावी पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुंचाने का माध्यम बनेगा। अंतरराष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव इसी सांस्कृतिक संकल्प को साकार करते हुए श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और जीवन-दर्शन को देश की विविध कला, नाट्य, लोक एवं साहित्यिक परंपराओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है।
*सात दिवस, सात से अधिक नृत्य शैलियां, सौ से अधिक कलाकार*
उन्होंने बताया कि 12 से 18 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित हो रही सात दिवसीय श्रीरामलीला उत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग नृत्य शैली में श्रीरामकथा के अलग-अलग प्रसंगों को प्रदर्शित किया जा रहा है। यह पहला अवसर है जब भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों में रामकथा के प्रसंगों का प्रदर्शन होगा। नृत्य की संरचनाओं, भूमिकाओं, भाव-भंगिमाओं, देह गतियों एवं पारंपरिक संगीत के साथ राम जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक के प्रसंग दर्शकों को दिव्य आनंद से भर देंगे। इसमें पहले दिवस 12 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी, इंफाल, मणिपुर के कलाकारों द्वारा मणिपुरी नृत्य शैली में नारद मोह, श्रीराम जन्म, विद्या अभ्यास एवं ताड़वा वध होगा। इसके बाद रात्रि 9 बजे से हृदय बैंड, भोपाल द्वारा भजन जैमिंग की प्रस्तुति होगी। दूसरे दिवस 13 अक्टूबर को सत्रिया केन्द्र, गुवाहाटी, असम के कलाकारों द्वारा सत्रिया नृत्य शैली में अहल्या उद्धार, पुष्प वाटिका, सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण परशुराम संवाद होगा। तीसरे दिवस 14 अक्टूबर को पूर्वरंग में चण्डूला कृष्णैया बुंदम, तेलंगाना द्वारा चण्डू भागवतम में सीताहरण, श्रीराम – सुग्रीव मिलन, सुग्रीव – हनुमान संवाद, लंका दहन के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद कथक केन्द्र, नई दिल्ली के कलाकारों द्वारा कथक नृत्य शैली में श्रीराम विवाह, सीता विदाई, मंथरा-कैकई संवाद, दशरथ-कैकई संवाद, श्रीराम वनवास, केवट प्रसंग एवं भरत मिलाप होगा। चौथे दिवस 15 अक्टूबर को पूर्वरंग में श्री रामाकेन दल, थाईलैंड द्वारा खोन नृत्य शैली जो यूनेस्को अमूर्त धरोहर है, में सीमा हरण, राम-रावण युद्ध प्रदर्शित किया जाएगा। इसके बाद कुटियाट्टम केन्द्र, तिरुवनंतपुरम्, केरल के कलाकारों द्वारा कुटियाट्टम नृत्य शैली में अनुसुइया उपदेश, पंचवटी प्रसंग, सीता हरण, जटायु वध एवं श्रीराम प्रतिज्ञा होगी। पाँचवें दिवस 16 अक्टूबर को पूर्वरंग में विभूति श्रीनिवास राजू चण्डू यक्षगान बुंधम, आंध्रप्रदेश द्वारा यक्षगान शैली में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता स्वयंवर, श्रीराम वनवास एवं श्रीराम – रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद गुरु केलुचरण महापात्र ओडिसी नृत्यबसा, ओडिशा के कलाकारों द्वारा ओडिसी नृत्य शैली में शबरी प्रसंग, श्रीहनुमान लीला, बालि वध, लंका दहन, विभीषण शरणागत, रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण मूर्छा एवं कुंभकरण वध की प्रस्तुति होगी। 17 अक्टूबर को छठवें दिवस पूर्वरंग में पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव स्मृति दिशा रामलीला, मास्को, रूस के कलाकारों द्वारा सीता स्वंयवर, श्रीराम का अयोध्या में स्वागत, सीता हरण, लंका में सीता, श्रीराम – रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद छऊ केन्द्र, झारखंड के कलाकारों द्वारा छऊ नृत्य शैली में मेघनाद वध एवं श्रीराम-लक्ष्मण हरण प्रसंग प्रस्तुत होंगे। सातवें एवं अंतिम दिवस 18 अक्टूबर को पूर्वरंग में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल के संस्कृत रंगमंडल प्रभाग द्वारा हिंदी एवं संस्कृत भाषा पर नाटक रामत्रयी की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद कलाक्षेत्र फाउंडेशन, चेन्नई, तमिलनाडु के कलाकारों द्वारा भरतनाट्यम नृत्य शैली में हनुमान का पाताललोक में प्रवेश, हनुमान – मकरध्वज संवाद, अहिरावण वध, रावण का धर्म उपदेश, श्रीराम-रावण युद्ध, रावण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक की प्रस्तुति होगी।
*12 से 14 अक्टूबर तक ‘अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन’*
उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव का शुभारंभ ‘‘अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन - अध्यात्म, मर्यादा और सुशासन: श्रीराम दर्शन का वैश्विक समागम’’ के साथ होगा। यह आयोजन 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक होगा। इसमें पहले दिन सायं 5 बजे से अंजनी सभागार, रवीन्द्र भवन में उद्घाटन सत्र होगा। जिसका केन्द्रीय विषय ‘रामराज्य की संकल्पना’ होगा। इसकी अध्यक्षता मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे एवं मुख्य वक्ता डॉ. इंद्रेश कुमार, सदस्य, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ होंगे। इसके अंतर्गत दूसरे दिवस 13 अक्टूबर, 2026 को गौरांजनी सभागार, रवीन्द्र भवन में प्रथम सत्र दोपहर 12 से 1:30 बजे तक होगा। इसका केन्द्रीय विषय ‘रामायणकालीन पारिस्थितिकी तंत्र’ होगा। जिसकी मुख्य वक्ता सुश्री मित्रा देसाई – शोधकर्ता, ऑस्ट्रेलिया होंगी। अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. भगवातीलाल राजपुरोहित – इतिहासकार एवं साहित्यकार, उज्जैन होंगे एवं सारस्वत वक्ता श्री पवन सिंह – शोधकर्ता, आजमगढ़ होंगे। द्वितीय सत्र 2:15 से 3:45 तक होगा। जिसका केन्द्रीय विषय ‘लोककथाओं में श्रीराम’ है। इसके मुख्य वक्ता श्री दिसनायके मुदियंसेलागे महील भंडारा – शोधकर्ता, श्रीलंका होंगे। वहीं, अध्यक्षता डॉ. पेरिसेट्टी श्रीनिवास, वरिष्ठ अध्येता, विजयवाड़ा एवं सारस्वत वक्ता श्री कुलदीप अग्निशेखर – लेखक, श्रीनगर तथा डॉ. बाला वेंकटेश्वर राव संकुरात्रि – शोधकर्ता, गुंटूर होंगे। सायं 4:10 से 4:40 बजे तक स्वरांकन गतिविधि होगी, जिसमें सुर, ताल और रंगों में प्रभु श्रीराम का सजीव चित्रण होगा। सायं 4:45 से 6:15 बजे तक तृतीय सत्र में “श्रीराम: आदर्श नेतृत्व और सुशासन का वैश्विक मॉडल” विषय पर विमर्श होगा। मुख्य वक्ता आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण जी महाराज, अयोध्या, महंत, हनुमत निवास पीठ होंगे। सत्र की अध्यक्षता श्री रघुनंदन शर्मा, तुलसी मानस प्रतिष्ठान, भोपाल करेंगे तथा सारस्वत वक्ता श्री उमाशंकर पचौरी, शिक्षाविद एवं लेखक, भोपाल होंगे। 14 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 12 से 1:30 बजे प्रथम सत्र में “आधुनिक लेखन, चित्रपट एवं कलाओं में श्रीराम” विषय पर विचार-विमर्श होगा। मुख्य वक्ता पद्मश्री डॉ. चिरापट प्रपंडविद्या, थाईलैंड, पुरात्तवविद् एवं संस्कृत विद्यान होंगे। अध्यक्षता श्री राजा बुंदेला, अभिनेता, मुंबई करेंगे। सारस्वत वक्ता श्री श्रीराम तिवारी, वरिष्ठ अध्येता, भोपाल रहेंगे। द्वितीय सत्र में दोपहर 2:15 से 3:45 बजे तक “पुरातत्व, मंदिर एवं आलेख में श्रीराम” विषय पर विमर्श होगा। मुख्य वक्ता पद्मश्री श्री के.के. मोहम्मद, वरिष्ठ पुराविद्, कालीकट होंगे। सत्र की अध्यक्षता श्री शिवाकांत वाजपेयी, वरिष्ठ पुराविद्, भोपाल एवं सारस्वत वक्ता श्री विजय मनोहर तिवारी, वरिष्ठ अध्येता, भोपाल होंगे। सायं 4:10 से 4:40 बजे तक स्वरांकन गतिविधि होगी, जिसमें सुर, ताल और रंगों में प्रभु श्रीराम का सजीव चित्रण होगा। सायं 4:45 से 6:15 बजे तक तृतीय सत्र में “वैश्विक रामकथाओं एवं परंपराओं पर विमर्श” होगा। मुख्य वक्ता महंत श्री रामरोशन दास जी महाराज, उत्तराधिकारी महंत, जानकी मंदिर, जनकपुर धाम, नेपाल होंगे। सत्र की अध्यक्षता श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, माननीय संस्कृति मंत्री, मध्यप्रदेश शासन करेंगे। सारस्वत वक्ता डॉ. अखिलेश गुमास्ता, लेखक एवं वरिष्ठ अध्येता, जबलपुर होंगे।
*ओरछा में तीन दिवसीय श्रीरामलीला उत्सव*
श्रीराम राजा मंदिर परिसर, ओरछा (जिला – निवाड़ी) में तीन दिवसीय ‘श्रीरामलीला उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा 11 से 13 अक्टूबर, 2026 तक सायं 6:30 बजे से श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों की प्रस्तुति होगी। ओरछा में आदर्श लीला मंडली, खजुरीताल, मैहर के कलाकारों द्वारा लीला प्रस्तुति दी जाएगी। उत्सव के प्रथम दिन 11 अक्टूबर को श्रीराम जन्म, मुनि आगमन, ताड़का वध, मारीच-सुबाहु वध एवं अहल्या उद्धार जैसे प्रसंग शामिल हैं। 12 अक्टूबर को धनुष यज्ञ, श्रीराम वनवास, केवट संवाद तथा सीता हरण प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। अंतिम दिन 13 अक्टूबर को कथा अपने निर्णायक और विजयपरक प्रसंगों की ओर बढ़ेगी। इस दिन शबरी की सेवा, बालि वध, लंका दहन, रावण-कुंभकर्ण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक की लीला प्रस्तुत की जाएगी। इन प्रसंगों के माध्यम से सेवा, भक्ति, धर्म की विजय और आदर्श शासन की अवधारणा को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया जाएगा।
*चित्रकूट में सात दिनों में जीवंत होंगे श्रीरामकथा के विविध प्रसंग*
जैसा कि विदित है कि श्रीराम ने अपने वन गमन के दौरान का अधिकांश समय चित्रकूट में व्यतीत किया और उनसे संबंधित अनेक पवित्र स्थल यहां हैं। 13 से 19 अक्टूबर, 2026 तक राघव प्रयाग घाट, चित्रकूट में ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन के कलाकार छह दिनों तक श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों की प्रस्तुति यहां देंगे। 13 अक्टूबर को उत्सव शुभारंभ श्रीराम जन्म एवं बाल लीला प्रसंग से होगा। इसमें श्रीराम जन्म, विश्वामित्र का आगमन, ताड़का वध और अहल्या उद्धार जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 14 अक्टूबर को पूर्वरंग में विभूति श्रीनिवास राजू चण्डू यक्षगान बुंधम, आंध्रप्रदेश द्वारा यक्षगान शैली में महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा, सीता स्वयंवर, श्रीराम वनवास एवं श्रीराम – रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद मुख्य लीला में सीता स्वयंवर से जुड़े प्रसंगों के साथ मिथिला नगरी का भव्य डिजिटल स्वरूप, शिव धनुष, सीता स्वयंवर एवं चारों भ्राताओं का विवाह प्रसंग दर्शाया जाएगा। 15 अक्टूबर को पूर्वरंग में श्रीरामलीला दल, थाईलैंड द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद मुख्य लीला में वनगमन एवं वन-जीवन से जुड़े प्रसंगों में कैकेयी के वरदान, राम – सीता – लक्ष्मण का वनगमन, केवट प्रसंग, भरत मिलाप और खर-दूषण वध को प्रस्तुत किया जाएगा। 16 अक्टूबर को पूर्वरंग में चण्डूला कृष्णैया बुंदम, तेलंगाना द्वारा चण्डू भागवतम में सीताहरण, श्रीराम – सुग्रीव मिलन, सुग्रीव – हनुमान संवाद, लंका दहन के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके बाद सीता हरण एवं श्रीराम की खोज के प्रसंग मंचित होंगे, जिसमें मारीच का छल, सीता हरण, जटायु युद्ध, श्रीराम का विलाप, श्रीराम-हनुमान मिलाप, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता के प्रसंग होंगे। 17 अक्टूबर को हनुमान के लंका प्रवेश से जुड़े प्रसंगों में बाली वध, सुग्रीव राज्याभिषेक, हनुमानजी की शक्ति स्मरण, लंका में प्रवेश, माता सीता-हनुमान संवाद और लंका दहन को प्रस्तुत किया जाएगा। 18 अक्टूबर को रामसेतु निर्माण, समुद्र संवाद, रामसेतु निर्माण, विभीषण शरणागति, कुंभकर्ण वध और लक्ष्मण मूर्छा जैसे प्रसंगों का मंचन होगा। श्रीरामलीला उत्सव के समापन अवसर पर 19 अक्टूबर को पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव स्मृति दिशा रामलीला, मास्को, रूस के कलाकारों द्वारा सीता स्वंयवर, श्रीराम का अयोध्या में स्वागत, सीता हरण, लंका में सीता, श्रीराम – रावण युद्ध की प्रस्तुति होगी। इसके बाद समापन रावण वध एवं श्रीराम राज्याभिषेक के साथ किया जाएगा। इसमें श्रीराम-रावण युद्ध, रावण वध, विभीषण का राज्याभिषेक, श्रीराम राज्याभिषेक और श्रीरामराज्य के प्रसंग प्रमुख रहेंगे।
*स्टोरी टेलिंग सेशन में ‘‘कौशलेय की वन गमन गाथा’’*
श्रीरामलीला उत्सव का एक और आकर्षण स्टोरी टेलिंग सत्र होगा। 15 से 17 अक्टूबर, 2026 तक सायं 5 से 7 बजे तक अंजनी सभागार, रवीन्द्र भवन में “कौशलेय की वन गमन गाथा - युवा कथाकारों के स्टोरी टेलिंग सत्र” का आयोजन होगा। इसमें पहले दिन 15 अक्टूबर को सुश्री अमि गणात्रा, मुंबई द्वारा “वाल्मीकि के हनुमान - बुद्धिमत्तां वरिष्ठम” विषय पर तथा श्री अंकित अवस्थी, अलवर द्वारा “श्रीरामचंद्र वन गमन पथ” विषय पर कथावाचन किया जाएगा। 16 अक्टूबर को श्री संदीप द्विवेदी, रीवा “यदि राम सा संबंध हो” विषय पर कथा प्रस्तुत करेंगे। वहीं, आचार्य देवव्रत यथिनाथ जी महाराज, वृंदावन द्वारा “वाल्मीकि के राम - सबसे अलग” विषय पर कथावाचन होगा। 17 अक्टूबर को श्री महेश कुमार सोहनी-खरगोन, आचार्य दिलीप कर्पे-खरगोन, श्री संदीप कुमार देहदानी - दिल्ली एवं श्री सुरेंद्रसिंह रामायणी-पन्ना द्वारा ‘श्रीराम वन गमन यात्रा के अनुभव वृत्तांत’ तथा श्री विशाल चौधरी-दिल्ली द्वारा ‘उपनिषदों का सार – श्रीराम’ विषयों पर कथा-वाचन किया जाएगा।
*‘राघव के रंग’ में कलाकारों की तूलिका रचेगी रामकथा*
श्रीरामलीला उत्सव में विविध कला विधाओं के माध्यम से श्रीराम के जीवन को दर्शाने के लिए 12 से 18 अक्टूबर, 2026 तक प्रातः 11 से सायं 6 बजे तक ललित कला गैलरी, रवीन्द्र भवन में ‘राघव के रंग’ चित्रकला शिविर आयोजित की जा रही है। इसमें सर जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट, आर्किटेक्चर एंड डिजाइन - मुंबई, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ – वाराणसी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय - वाराणसी एवं शासकीय ललित कला महाविद्यालय, जबलपुर, धार, खंडवा, इंदौर, ग्वालियर एवं राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर सहयोगी संस्थाओं के रूप में सहभागी होंगे। इस कार्यशाला में तैयार चित्रों की प्रदर्शनी आयोजन के अंतिम दिवस लगाई जाएगी।
*राम लेखन कार्यशाला एवं काव्य – मानस*
16 एवं 17 अक्टूबर, 2026 को प्रात: 11 से दोपहर 2 बजे तक ललित कला गैलरी, रवीन्द्र भवन में ‘‘राम लेखन कला’’ कार्यशाला होगी। इसमें सुश्री कविता डागा, कोलकाता, टाइपोग्राफी द्वारा प्रतिभागियों को राम लेखन की कला से परिचित कराया जाएगा। इस कार्यशाला में भोपाल के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय के छात्र – छात्राओं की सहभागिता रहेगी। इसके अलावा 16 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 2 से सायं 5 बजे तक अंजनी सभागार, रवीन्द्र भवन में “काव्य-मानस” कार्यक्रम होगा। इसमें चयनित युवाओं की सहभागिता एवं श्रीरामचंद्र केंद्रित रचनाओं, भजन/कविता, गान/गजल एवं संत कवियों एवं आधुनिक कवियों के पद/दोहों के माध्यम से श्रीराम के विविध भावों को अभिव्यक्ति दी जाएगी।
*प्रदर्शनी में दिखेगी देश-विदेश की रामलीला परंपरा*
श्रीरामलीला उत्सव के अंतर्गत 12 से 18 अक्टूबर, 2026 तक दोपहर 12 बजे से रवीन्द्र भवन परिसर में विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं। इसमें भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों की श्रीरामलीला में प्रयुक्त मुकुट, मुकुट-आभूषण, चित्र, वाद्ययंत्र, अस्त्र-शस्त्र, वेशभूषा और कठपुतली कला प्रदर्शित की जाएगी, जिसमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली का सहयोग रहेगा। प्रदर्शनी में श्रीरामचंद्र केंद्रित सिक्के, डाक टिकट, विशेष स्मारक टिकट, प्रतिमाओं के चित्र एवं श्रीरामजी के 36 गुणों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी होगी। इसके अतिरिक्त शासकीय ललित कला महाविद्यालय, जबलपुर के छात्र – छात्राओं की ‘रंगों में राम’ चित्र प्रदर्शनी, रामायणकालीन भारत पर मानचित्र एवं पुरातात्विक डिजिटल प्रदर्शनी, रामपथ गमन स्थलों की कथाओं पर डिजिटल प्रदर्शनी एवं श्रीरामचंद्र केंद्रित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी होगा। इस प्रदर्शन एवं प्रदर्शनी का उद्देश्य श्रीरामकथा के विविध प्रसंगों को अलग – अलग माध्यमों से आमजनों तक पहुंचाना है।
*कठपुतलियों के माध्यम से जीवंत होगी श्रीरामकथा*
जैसा कि ज्ञात है कि कठपुतली शैली, किसी कथा को कहने का प्राचीन एवं लोकप्रिय माध्यम रहा है। आमजन इस लोकप्रिय शैली के माध्यम से श्रीरामकथा के प्रसंगों को आत्मसात करें इसलिए 13 से 16 अक्टूबर, 2026 तक दोपहर 3 से सायं 5 बजे तक रवीन्द्र भवन में कठपुतली प्रदर्शन होगा। इसमें श्री बालकृष्ण गणपत मस्गे, दयती लोककला संवर्धन अकादमी, पिंगुली (सिंधुदुर्ग), महाराष्ट्र द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर एकांकी प्रस्तुति दी जाएगी। इस प्रस्तुति में लोककला, कठपुतली और रामकथा का अनूठा संगम दर्शकों को देखने को मिलेगा।


